मधुबनी पेंटिंग
37 वर्षीय रेमंत मधुबनी पेंटिंग वाले मास्क तैयार कर आम से खास लोगों को उपलब्ध कराने में जुटे हैं। सोशल मीडिया पर उनके ऐसे मास्क पर रवीना टंडन की नजर पड़ गई। उन्होंने ट्वीट में इसकी तारीफ कर दी। फिर क्या था, रेमंत ट्रेंड होने लगे। ऑर्डर पर आर्डर आने लगे। स्थिति यह हो गई कि उन्हेंं मोबाइल स्विच ऑफ करना पड़ा।
जैसा कि हम लोग जानते हैं कि पुराने समय से ही भारत को कला और संस्कृति का देश माना गया है| आप सोच रहे होंगे मधुबनी क्या है? मधुबनी भारत के बिहार राज्य में स्थित एक जिला है|मधुबनी दो शब्दों से मिलकर बना है, मधु और बनी |मधु का मतलब है-शहद और बनी का मतलब है- जंगल यानी शहद का जंगल|यह पेंटिंग बिहार के मधुबनी जिले की एक स्थानीय कला है, जिसकी वजह से इस पेंटिंग का नाम मधुबनी पेंटिंग रखा गया|मधुबनी पेंटिंग को मिथिला पेंटिंग के नाम से भी जाना जाता है| यह पेंटिंग बिहार की एक प्रमुख चित्रकला है|कहां जाता है कि इस कला की शुरुआत रामायण के युग में हुई थी, उस समय राजा जनक ने मां सीता के विवाह के अवसर पर इसे गांव की औरतों से बनवाया था| मधुबनी पेंटिंग में ज्यादातर कुल देवी देवताओं का चित्रण देखने को मिलता है
आपको बता दें कि साल 1934 से पहले मधुबनी पेंटिंग को केवल गांव की एक लोककला के रूप में जाना जाता था|लेकिन साल 1934 में मिथिलांचल में आए भूकंप के बाद से यह केवल लोककला के तौर पर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कला के तौर पर जाना जाने लगा|कहा जाता है कि जब विलियम आर्चर(जो उस समय मधुबनी के ब्रिटिश ऑफिसर थे) भूकंप से हुए भारी भरकम नुकसान को देखने के लिए गए तब उन्होंने वहां पर अलग-अलग प्रकार की खूबसूरत पेंटिंग देखि|जो उनको एकदम नई और अनोखी लगी|उसके बाद उन्होंने उन सभी पेंटिंग्स की ब्लैक एंड वाइट तस्वीरें निकालनी जिसे मधुबनी पेंटिंग के इतिहास में अब तक की सबसे पुरानी तस्वीरों में से माना जाता है|साल 1949 में उन्होंने ‘मार्ग’ के नाम से एक आर्टिकल लिखा था,जिसमें उन्होंने मधुबनी पेंटिंग की खासियत के बारे में विस्तार से बताया था| उनके इस आर्टिकल के बाद पूरी दुनिया को मधुबनी पेंटिंग की सुंदरता और खासियत के बारे में पता चलने लगा|